निचलौल थाना सवालों के घेरे में: ‘दलाल तंत्र’, वसूली और अनैतिक कारोबार के आरोपों से मचा हड़कंप
महराजगंज/निचलौल:
निचलौल थाना क्षेत्र इन दिनों गंभीर आरोपों को लेकर चर्चा में है। स्थानीय लोगों और सूत्रों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों ने पुलिस व्यवस्था की पारदर्शिता और कार्यशैली पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि थाने में फरियादियों की सुनवाई सीधे पुलिस अधिकारियों द्वारा नहीं, बल्कि कथित बिचौलियों और ‘कारखास’ लोगों के जरिए कराई जाती है।
थाने में ‘दलाल तंत्र’ सक्रिय होने का आरोप
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि थाने के अंदर और बाहर कुछ कथित बिचौलिए सक्रिय हैं, जो शिकायत दर्ज कराने से लेकर समझौता कराने तक की प्रक्रिया में दखल देते हैं। आरोप यह भी है कि फरियादियों को सीधे पुलिसकर्मियों तक पहुंचने के बजाय पहले इन लोगों से संपर्क करने के लिए कहा जाता है।
‘रेट तय’ होने के आरोप
सूत्रों के अनुसार, विभिन्न मामलों में कथित रूप से रकम तय होने की चर्चाएं क्षेत्र में आम हैं। आरोप है कि मामूली विवाद, एफआईआर दर्ज कराने और जमीन संबंधी मामलों में अलग-अलग स्तर पर पैसे मांगे जाते हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन चर्चाओं ने पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जमीन विवाद में वसूली का आरोप
30 अप्रैल 2026 को सिरौली गांव में हुए एक जमीन विवाद के मामले में भी पुलिस की भूमिका पर सवाल उठे हैं। आरोप है कि सुलह कराने के नाम पर पीड़ित पक्ष से मोटी रकम ली गई और बाद में दस्तावेज देने के लिए भी अतिरिक्त पैसे मांगे गए। पीड़ित पक्ष कथित रूप से न्याय के लिए भटकता रहा।
रेस्टोरेंट की आड़ में अनैतिक गतिविधियों के आरोप
कस्बे के कुछ रेस्टोरेंट्स को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कुछ स्थानों पर अनैतिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं और इन पर कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जाती है। आरोप यह भी है कि कथित रूप से पुलिस से जुड़े कुछ खास लोग नियमित वसूली में शामिल हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
कानून व्यवस्था और पुलिस छवि पर सवाल
कानून विशेषज्ञों का मानना है कि यदि थानों में बिचौलियों का हस्तक्षेप और अवैध वसूली जैसी गतिविधियां होती हैं, तो यह कानून और सेवा नियमों दोनों का उल्लंघन माना जाएगा। इससे पुलिस की निष्पक्षता और जनता के भरोसे पर सीधा असर पड़ता है।
वरिष्ठ अधिकारियों से जांच की मांग
क्षेत्र में उठ रहे इन आरोपों के बाद अब लोग निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मामले की गंभीरता से जांच नहीं हुई, तो पुलिस और प्रशासन पर जनता का विश्वास कमजोर हो सकता है।
फिलहाल इन आरोपों पर संबंधित पुलिस अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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