Maharajganj
ठूठीबारी/सोनौली (महराजगंज)। भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में तस्करी का संगठित नेटवर्क तेजी से फैलता नजर आ रहा है। दोगुना-तीन गुना मुनाफे के लालच में धंधेबाज दिनदहाड़े सामान इकट्ठा करते हैं और अंधेरा होते ही उसे सीमा पार पहुंचा देते हैं। हालात ऐसे हैं कि खुली सीमा का फायदा उठाकर तस्कर प्रशासन को खुली चुनौती देते दिखाई दे रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार इन दिनों नेपाल से विदेशी मक्का और अखरोट की तस्करी हो रही है, जबकि भारत से बीज, कॉस्मेटिक सामान और ब्रांडेड जूतों को नेपाल पहुंचाया जा रहा है। तस्करों का मुनाफा भी चौंकाने वाला है। नेपाल में करीब 60 रुपये किलो खरीदा गया मक्का भारत में 100 रुपये तक बिक जाता है, जबकि 250 रुपये किलो का अखरोट भारत पहुंचते ही 500 रुपये तक में बेचा जा रहा है। वहीं भारत में 200 रुपये के जूते नेपाल में 600 रुपये तक बिक रहे हैं।
बीज का कारोबार भी बड़ा है—भारत में लगभग 1100 रुपये किलो मिलने वाला बीज नेपाल में 3000 रुपये तक बेचा जा रहा है।
हालांकि पुलिस, एसएसबी और जीएसटी की टीमें समय-समय पर कार्रवाई कर रही हैं, लेकिन इसके बावजूद तस्करों के हौसले कम होते नहीं दिख रहे हैं।
कार्रवाई के प्रमुख मामले
14 मार्च: सीमा स्तंभ संख्या 505 के पास एसएसबी ने एक बाइक, 10 साइकिल और 37 बोरी (करीब 50 किलो प्रति बोरी) विदेशी मक्का बरामद किया।
10 फरवरी: भरवलियां गांव के पास गन्ने के खेत से 19 बोरी (करीब 9.5 कुंतल) विदेशी मक्का बरामद किया गया।
हालिया छापेमारी
लक्ष्मीपुर खुर्द में नायब तहसीलदार प्यूस जायसवाल, कस्टम अधीक्षक भगवान शाह और चौकी इंचार्ज मनीष कुमार पटेल की संयुक्त टीम ने छापा मारकर भारी मात्रा में अवैध चप्पल, क्रीम और अन्य सामान जब्त किया।
नेपाल में भी कार्रवाई
सोनौली बॉर्डर से तस्करी कर नेपाल पहुंचाए गए ब्रांडेड जूतों पर भैरहवा पुलिस ने भी शिकंजा कसा है। डीएसपी कृष्णा कुमार चंद के मुताबिक करीब 1.50 लाख रुपये के जूते बरामद कर भन्सार विभाग को सौंप दिए गए हैं।
प्रशासन का दावा बनाम हकीकत
कस्टम अधीक्षक भगवान शाह का कहना है कि सीमा पर सख्ती बरती जा रही है और तस्करी किसी भी हाल में नहीं होने दी जाएगी।
लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। तस्कर लगातार नए-नए तरीके अपनाकर इस अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे हैं।
बड़ा सवाल
जब बार-बार बरामदगी हो रही है तो तस्करी के पूरे नेटवर्क तक एजेंसियां क्यों नहीं पहुंच पा रही हैं? आखिर कौन है इस ‘बॉर्डर सिंडिकेट’ का मास्टरमाइंड?
निष्कर्ष
सीमा पर सख्ती के दावे अपनी जगह हैं, लेकिन जब तक तस्करी के पूरे नेटवर्क पर निर्णायक कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह मुनाफे का काला खेल यूं ही फलता-फूलता रहेगा।

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