संपादक: सुनील पाण्डेय उत्तर प्रदेश
महराजगंज। जनपद की राजनीति उस समय गरमा गई जब सोशल मीडिया पर 500-500 रुपये के नोटों की गड्डियों से जुड़ा एक वीडियो तेजी से वायरल हो गया। करीब 20 सेकेंड के इस वीडियो में एक कमरे के भीतर रेड कारपेट पर सजी नोटों की गड्डियां दिखती हैं, जबकि भाजपा के जिलामंत्री गौतम तिवारी मोबाइल की फ्लैशलाइट से नोटों को देखते नजर आते हैं।
वीडियो में एक आवाज सुनाई देती है—
“लाइट बुझा दीजिए…”
इसके कुछ ही पल बाद दूसरी आवाज आती है—
“मंत्री जी, वीडियो बन गया है।”
इस संवाद ने वीडियो को और भी संदिग्ध बना दिया, जिससे जिले की सियासत में भूचाल आ गया।
भाजपा जिलामंत्री की सफाई
वीडियो वायरल होने के बाद जिलामंत्री गौतम तिवारी ने पत्रकारों को बुलाकर सफाई दी। उन्होंने दावा किया कि वीडियो में दिख रहा पैसा असली नहीं बल्कि कागज़ का नकली नोट है। उनका कहना है कि कुछ तंत्र-मंत्र करने वालों ने उन्हें झांसे में लेकर जमीन दिलाने के नाम पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी की।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वीडियो बनारस से जुड़े कुछ लोगों द्वारा साजिशन बनाया गया है और इसका हवाला या भ्रष्टाचार से कोई लेना-देना नहीं है।
गौतम तिवारी ने कहा—
“यह पैसा मेरा नहीं है। मैंने एफआईआर के लिए आवेदन दे दिया है। पुलिस जांच करेगी।”
पुलिस का बयान: आवेदन नहीं मिला
मामला तब और उलझ गया जब कोतवाली प्रभारी निरीक्षक निर्भय सिंह ने स्पष्ट किया—
“इस प्रकरण में अभी तक थाने में कोई प्रार्थना पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। आवेदन मिलने पर जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”
एक तरफ एफआईआर देने का दावा, दूसरी ओर पुलिस रिकॉर्ड में आवेदन का अभाव—इस विरोधाभास ने सवालों को और गहरा कर दिया है।
सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया
वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। लोग इस मामले को हवाला कारोबार, काले धन और राजनीतिक संरक्षण से जोड़कर देख रहे हैं, हालांकि भाजपा जिलामंत्री इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर रहे हैं।
अब भी कई सवाल
वीडियो कब और कहां का है?
नोट असली हैं या नकली, इसकी जांच कब होगी?
अगर पैसा नकली था तो इतनी बड़ी मात्रा में वीडियो क्यों बनाया गया?
एफआईआर दी गई है तो थाने के रिकॉर्ड में दर्ज क्यों नहीं?
राजनीति में ‘वीडियो बम’
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सत्ता, पैसा और साजिश के बीच सच्चाई आखिर कहां है। अब सबकी निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं, जिससे यह तय हो सके कि मामला ठगी का है या सियासी सफेदी की कोशिश।


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