महराजगंज, 23 फरवरी 2026।
सिंचाई विभाग में तैनात जूनियर इंजीनियर (जेई) रविंद्र यादव का तबादला आदेश जारी होने के आठ माह बाद भी जनपद से रिलीव न होना चर्चा और सवालों का विषय बन गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार जून माह में जेई कौशल और रविंद्र यादव—दोनों का तबादला हो चुका था, लेकिन अब तक कार्यमुक्ति की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।
सूत्रों का दावा है कि नारायणी और नेपाल सीमा से जुड़े बांधों सहित अन्य परियोजनाओं पर लंबित बिल-बाउचर और भुगतान से जुड़े मामलों में ‘कमीशन’ की चर्चाएं तेज हैं। बताया जा रहा है कि इन दिनों संबंधित अधिकारी बिल-बाउचर लेकर कार्यालय और साइटों के चक्कर लगा रहे हैं। विभाग के अंदरखाने यह भी चर्चा है कि महत्वपूर्ण फाइलों के निस्तारण और भुगतान स्वीकृति से पहले कथित आर्थिक लेन-देन की कोशिशें हो रही हैं।
रविंद्र यादव पिछले पांच वर्षों से अधिक समय से एक ही बांध पर तैनात रहे हैं। इस दौरान कार्यों की गुणवत्ता, मरम्मत मद और आपातकालीन खर्चों को लेकर कई बार सवाल उठे, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। अब तबादले के बाद भी रिलीव न होने से पारदर्शिता और प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर प्रश्नचिह्न लग रहा है।
स्थानीय स्तर पर यह मामला तेजी से राजनीतिक रंग भी ले रहा है। जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आदेश के बावजूद रिलीविंग नहीं हो पा रही है, तो जिम्मेदारी तय कर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि प्रक्रिया जारी है और शीघ्र ही आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी। हालांकि जब तक रिलीविंग नहीं होती, तब तक आरोप-प्रत्यारोप का दौर थमने के आसार नहीं दिख रहे हैं। जिले में यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बनता जा रहा है।

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